Quran e Kareem Ka Tauzeehi Tarjuma Hindi | क़ुरान ए करीम का तौज़ीही तर्जुमाQuran e Kareem Ka Tauzeehi Tarjuma Hindi | क़ुरान ए करीम का तौज़ीही तर्जुमा
Quran Tarjuma हिन्दीOriginal price was: ₹750.00.₹700.00Current price is: ₹700.00.
मौलाना हस्सान नोमानी का उर्दू तरजुमए क़ुरआन “तौज़ीही तरजुमा” अपनी मिसाल आप है, इस तरजुमा की असल ख़ुसूसियत यह है कि इसमें मुख़्तसर तफ़्सीर को हवाशी में दर्ज न करके दरमियान तरजुमा ही में दर्ज कर दिया गया है, इस तरह कि क़ारी का तसल्लुस भी क़ायम रहता है, उसे बार-बार हाशिये की तलाश और फिर उसे पढ़ने की ज़हमत नहीं उठानी पड़ती, यह तरजुमा चन्द बरस क़ब्ल उर्दू में शाया हुआ और निहायत मक़बूल हुआ, यक़े-बा-दूगर इसके मुतअद्दिद एडिशन्स शाया होते रहे हैं।
अब यह तरजुमा व मुख़्तसर तफ़्सीर आसान हिन्दी ज़बान में शाया होकर मंज़रे आम पर आया है, इसकी चन्द ख़ुसूसियात इसको हिन्दी ज़बान में मौजूद क़ुरआन के तराजिम में मुम्ताज़ और मुफ़ीद तर बनाती हैं, जिनमें से दो ख़ास तौर पर क़ाबिले-ज़िक्र हैं:
यह महज़ तरजुमा नहीं है, इस लिए कि तन्हा तरजुमा पढ़ने के बाद मुतअद्दिद मक़ामात पर तिश्नगी रह जाती है, और आयत को सही तौर पर समझने के लिए कम-अज़-कम मुख़्तसर तफ़्सीर की ज़रूरत होती है, इसमें मुख़्तसर तफ़्सीर भी साथ में दर्ज है, लेकिन इस तरह कि क़ारी को हाशिये की तलाश और फिर उसे पऱ्हने की ज़हमत नहीं उठानी पड़ती। बल्कि वह रवानी के साथ तरजुमा मुख़्तसर तफ़्सीरी जुमलों के साथ पढ़ता चला जाता है, मुसन्निफ़ का कमाल यह है कि उन्होंने यह तफ़्सीरी या तौज़ीही जुमले तरजुमा के दरमियान इस तरह शामिल किए हैं कि यह जुमले के दरमियान होने की वजह से मुम्ताज़ होते हैं, यानी क़ारी के सामने तरजुमा और तफ़्सीर का फ़र्क़ वाज़ेह रहता है।
दूसरे बहुत से तराजिम की तरह इसमें सख़्त हिन्दी ज़बान इस्तेमाल नहीं की गई है, बल्कि बिल-उमूम वह आसान ज़बान इस्तेमाल की गई है जो आम मुसलमान अपनी गुफ़्तगू में इस्तेमाल करते हैं, जब कि क़ुरआन मजीद के अक़्सर हिन्दी तराजिम इतनी सख़्त हिन्दी ज़बान में हैं कि आम मुस्लिम क़ारी के लिए नाक़ाबिले-फहम हो जाते हैं, इस तरह यह तरजुमा आम फहम होने में भी मुम्ताज़ व बे-मिसाल है।
यहाँ इस तरजुमए क़ुरआन का एक सफ़्हा साथ में मुल्हक किया गया है, उम्मीद है इसको पढ़ कर क़ारीइन इस तरजुमा की ख़ुसूसियात का कुछ अन्दाज़ा कर सकेंगे।








